आज भी बहुत से लोग जिन्होंने नया नया कंप्यूटर लिया है, वह भी ब्लॉगिंग से अन्जान रहते हैं. उन्हें नहीं पता होता की यह क्या चीज़ है और कैसे इसे समझें और कैसे करें.
कमाल की बात है कि अभी तक हिन्दी में ऐसे कायदे के ब्लॉग बने ही नहीं हैं जो इस बारे में खुल कर बात करें.
मैने भी बहुत ही आराम कर लिया पर आज की दो घटनाओं ने मुझे " ब्लॉग्स पण्डित " पर फिर से लिखने को प्रेरित किया है.
आज एक पुराने परिचय के अंकल जी आए कहीं से जब उन्हें मदद न मिली तो उनके दिमाग़ में आया की यह लड़का राजीव कुछ ऐसा ही काम करता है वह ज़रूर जानता होगा.
उन्हें नहीं पता था की वे ई-गुरु राजीव से बात कर रहे हैं. वे मेरे घर लगभग दो घंटे बैठे रहे और ब्लॉगस्पॉट पर बनाए अपने ब्लॉग के बारे में और पोस्टिंग के बारे में जिज्ञासा रखते रहे और मुझसे समाधान पाते रहे. मुझे उनकी मदद करके बड़ा ही अच्छा लगा.
उनके जाने के बाद मैंने सोचा की चलो अब थोड़ी सी घुमाई हो जाए. पहुँचा सहारा गंज, वहाँ पर नेस्केफे की कॉफी के लिए तो बस जान देने को तैयार रहता हूँ.
मैं कॉफी पी रहा था की तभी मुझे पीछे के टेबल से कुछ आवाज़ सुनाई दी. दो लड़कियों की आवाज़ें थी.
पहली : अच्छा छोड़ वो सब ये बता की क्या तूने " ब्लॉग्स पण्डित " ब्लॉग देखा है... ( यही सुनकर तो मेरे कान खड़े हो गये )
दूसरी : अरे हाँ, यार यहीं का लोकल है पर लिखने से ज़्यादे तो उसकी नाटक बाज़ी ही चलती है.
पहली : अरे नहीं यार, अच्च्छा लिखता था पता नहीं क्या हो गया.
मेरा मन किया कि मुँह घुमाएँ और बोलें कि हम ही हैं ई-गुरु राजीव, पर यार हिम्मत ही नहीं हुई. दरअसल हम चकित से ही रह गये , सार्वजनिक रूप से अपने ब्लॉग की चर्चा सुनकर.
अब कसम खाई है की अब उन लड़कियों के लिए नियमित रूप से तो लिखूंगा ही, चाहे जो हो.
क्या आपके ब्लॉग की आस पड़ोस में चर्चा होती है ! यदि नहीं तो आज ही उनको बताइए भाई कि आप एक ब्लॉगर हैं.
अपनी कॉलोनी का सेलेब्रिटी बनिए और यदि ब्लॉग नहीं है तो एक प्यारा सा ब्लॉग बनाइये अभी और इसी वक्त.
शुभकामनाएं.
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Friday, April 30, 2010
" ब्लॉग्स पण्डित " का सामाजिक वजूद
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अच्च्छा लिखता था पता नहीं क्या हो गया.
अंग्रेज लड़कियाँ (फोटो से दिख रहा है) हिन्दी में आपके हिन्दी ब्लॉग की चर्चा कर रही थीं, कमाल हो गया, बधाई आपको। :)