कैसे पहचानें कि अब आप एक इन्टरनेट कीड़ा हो गए हैं !!
जी हाँ, दोस्तों ब्लॉगिंग अब एक महामारी की तरह से बढ़ रही है. लोग परेशान हो रहे हैं.
पत्नी परेशान है कि कैसे इनकी ब्लॉगिंग की लत छुडाऊँ. घर में रोटी नहीं ई-गुरु बनने चले हैं.
बेटा परेशान सा बाप की कुर्सी के पीछे खडा है कि ये उठें तो मैं अपना ब्लॉग देखूं.
पत्नी कि ब्लॉगिंग से पति परेशान कि इनका वाचन ख़तम हो तो रोटी मिले.
ये बिलागिंग बड़ा ही भारी रोग हो चुका है भारत में. अब तक 6000 रोगियों कि पहचान हो चुकी है.
कैसे जानें इस रोग के लक्षण को. बहुत ही ज़रूरी है यह जानना ताकि आप अपना इलाज समय पर करवा सकें.
1. किसी की शादी में आप अपने पति को 'एडमिनिस्ट्रेटर' और बेटे को 'मोडरेटर' बता कर परिचय दें.
2. जब किसी से मिलने पर आपके मुंह से "जय राम जी की" के जगह पर "जय गूगल जी की" निकल जाए.
3. जब आप अपनी खांसी की दवा भी अपने ई-गुरु राजीव से पूछें.
4. जब आपकी पत्नी को खाना खिलाने लिए ई-मेल करके आपको बुलाना पड़ता हो.
5. जब आप किसी से -- अरे यार, फोटो देखिये -->
6. जब आपकी पत्नी दूसरी महिला से आपके बारे में कहे कि -- अरे सखी ! मेरे वो तो अब सुबह की कुल्ली भी पहली पोस्ट पब्लिश करके ही करते हैं.
दूसरी महिला - ये ई-गुरु तो बरबाद करके ही छोड़ेगा मेरे पति को, कल मेरे पति को फोटो लगना सिखाया था और आज विडियो लगाना भी सिखा दिया है.
और ये अब एक आर्टिकल में फोटो तो दूसरे में विडियो लगा रहे हैं.
और तो जैसे कोई काम रह ही नहीं गया है.
बच्चे की फीस इन्टरनेट में घुसा दी है. ये ई-गुरु तो बस पैसा डुबोना ही बता रहा है, कमाना तो बिल्कुल भी नहीं.
(वैसे मुझ पर बहुत ही बड़े-बड़े आरोप लगाए हैं आप सभी ने. साथियों बहुत ही जल्द मैं कमाई की भी बात करूंगा.)
7. जब आप किसी को बीच सड़क पर धिक्कारने लगें कि -- क्या !! तुम्हारा कोई ब्लॉग नहीं है !! (बेवकूफ औरत)
8. जी आप का एड्रेस क्या है, सुनते ही आप के मुंह से निकल जाए - ****@gmail.com
या फ़िर आप बोल जाएँ - *****.blogspot.com
9. जब आप किसी से मिलते ही उसका URL एड्रेस (Blog Address) पूछ बैठें.
Monday, May 10, 2010
9 तरीके जानने के : क्या आप इन्टरनेट कीड़ा हो गए हैं !!
Sunday, May 9, 2010
चिट्ठे का विषय किस प्रकार से चुनें ?
पिछला लेख था कि किसी भी ब्लॉग का विषय निर्धारित क्यों होना चाहिये ?
अब आप यह जानिए कि किसी भी ब्लॉग का विषय किस प्रकार से चुनना चाहिये.
यह प्रश्न यदि इस प्रकार से देखें कि आप किस विषय पर लिखना अधिक पसन्द करेंगे, तो आप को समझने में ज्यादा सरलता होगी.
यदि आप कुछ समय से ब्लॉगिंग कर रहे हैं तो आप अपने लेखों को देखकर यह सहजता से अनुमान लगा सकते हैं कि आप किस विषय पर लिखना अधिक पसन्द करेंगे.
आप की सरलता के लिए कुछ विषयों की एक सूची भी मैंने बना दी है, आप इनमें से अपनी पसन्द के विषय सरलतापूर्वक चुन सकते हैं.
यह इस प्रकार है ---
1. भाषा-साहित्य
2. हास्य-व्यंग्य
3. कविता
4. सम-सामयिक
5. तकनीक
6 . संगीत-मनोरंजन
7. धर्म-अध्यात्म
8. फ़िल्म-टेलीविजन
9. आत्म-विकास
10. समीक्षा
11. जीवन-शैली
12. खेल-कूद
13. संस्मरण
14. पूँजी-निवेश
15. फोटो-पेंटिंग
16. चुटकुले और हास्य-व्यंग्य
17. घर-संसार
18. कार्टून
19. सैर-सपाटा
20. कथा-कहानी
21. सौंदर्य
22. विज्ञान
23. राजनीति
24. सेहत
मुझे लगता है कि आप जिस किसी विषय पर लिखना चाहें वह इसमें सरलता से मिल जायेगा. आप इनमें से अपनी पसन्द का कोई एक विषय चुन सकते हैं.
और हाँ, इस बात का पूरा ख़याल रखियेगा कि आपके लेख उसी विषय पर ही केंद्रित रहें.
यदि आप ने 'राजनीति' विषय चुन लिया है तो उसी पर लिखें परन्तु आप यदि कोई अपनी लिखी कहानी को भी नेट पर डालना चाह रहे हैं तो उसे एक नए ब्लॉग में लिखें.
इस बात से मत घबराएं कि यदि आप दूसरी कहानी नहीं लिखेंगे तो आप का वह एक कहानी वाला ब्लॉग चिट्ठों की आने वाली बाढ़ में कहीं दब-छिप जायेगा.
इसका उपाय है कि आप दोनों ब्लॉगों को एक दूसरे पर लिंक दे दें. इससे दोनों एक दूसरे का प्रचार करेंगे.
आइये अब एक उदाहरण से भी समझिये कि सही विषय का चुनाव एक ब्लॉग को किस प्रकार से ऊँचाइयों पर ले जाता है --
एक ब्लॉग है ' थोड़ा सा सुकून ' ( मैं इस पर अक्सर गाने सुनने के लिए जाता हूँ. नए पुराने हर तरह के सुपर हिट गाने हैं जिन्हें सुनकर दिल खुश हो जाता है.
इस ब्लॉग का विषय है - गाने.
मात्र फिल्मी गीतों पर आधारित यह ब्लॉग ब्लॉग-जगत में अत्यन्त लोकप्रिय है. कम समय में ही इस ब्लॉग ने अच्छी प्रसिद्दि पायी है, मात्र अपनी विषय-वस्तु के कारण.
एक पुराना चिट्ठा है 'सारथी' यह एक सामाजिक चिट्ठा है. यह सामाजिक समस्याओं को हमेशा उठता रहता है और विभिन्न प्रकार की जानकारियाँ भी देता है. अपनी सामाजिकता के कारण यह अत्यन्त लोकप्रिय है. --
यहाँ पर आप चुटकुले नहीं पाएँगे और न ही तकनीकी लेख जैसे की मैं लिखता हूँ. यहाँ पर बहुत ही शिक्षाप्रद, संस्कार और ज्ञान की बातें होती हैं. आप जरूर देखें.
इसमें आप 'सिंह इज किंग' का मूवी रिव्यू भी नहीं पायेंगे.
अंत में,
संक्षिप्त में कहूं तो विषय-वस्तु का चुनाव केवल किस विषय पर लिखने पर ही निर्भर नहीं करता है बल्कि यह बात भी उतनी ही महत्वपूर्ण है कि हमें क्या नहीं लिखना चाहिये.
Monday, May 3, 2010
सावधान !! आप का ब्लॉग खतरे में,

यह लेख केवल उन्हीं ब्लॉग लेखकों के लिए महत्वपूर्ण है, जो अपने ब्लॉग से प्यार करते हैं.
यदि आप अपने ब्लॉग में अपनी व्यक्तिगत बातें लिख रहे हैं या अपनी रचनाएं लिख रहे हैं और आप को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई पढ़ रहा है या नहीं, टिप्पणियाँ भी आप अपने लेख के लिए ज़रूरी नहीं समझते हैं तो यह लेख भी आप के लिए बेकार साबित होगा.
यदि आप किसी राजनीतिक विषय या किसी ऐसे विषय पर लेख लिख रहे हैं जिस के लिए पाठक और टिप्पणियाँ ज़रूरी हैं तो आप को ज़रूर ही यह लेख ध्यान से पढ़ना चाहिए.
यदि आप दो-तीन महीने से ब्लॉगिंग कर रहे हैं और आप की ब्लॉगिंग सीरियस है तथा आप लंबे समय तक लिखना चाहते हैं,
परन्तु अभी तक आप ने यह नहीं सोचा है कि आप किस विषय पर लिख रहे हैं या लिखेंगे तो आप का ब्लॉग खतरे में पड़ने वाला है.
ब्लॉगिंग शुरू करते समय तो हमें इस बात का ध्यान नहीं रहता कि हम किस विषय पर लिख रहे हैं,
परन्तु यदि जल्द ही हम इस और ध्यान नहीं देते हैं तो हमारे ब्लॉग की धीरे-धीरे मृत्यु होने लगती है.
किसी भी ब्लॉग की सांसें उसके पाठक और टिप्पणियाँ ही होते हैं.
अतः यह ध्यान देना ही होगा कि पाठक किस ब्लॉग पर जाता है और क्यों ?
पाठक उसी ब्लॉग को पसंद करते हैं जहाँ पर उनकी पसंद की सामग्री प्रचुर मात्र में मिल जाती है. यही आपके ब्लॉग को उन्नत बनाता है, उच्च रैंकिंग भी दिलाता है.
कोई भी पाठक किसी भी चिट्ठे पर उसके लेखों की गुणवत्ता और और संख्या को देखकर ही जाता है.
यदि आप के ब्लॉग पर 40 चुटकुले या व्यंग्य और 25 तकनीकी लेख लिखे गए हैं तो वह पाठक जो चुटकुला-प्रेमी है उसी ब्लॉग को पसंद करेगा जिस पर 60 चुटकुले हों या तकनीकी लेख न हों.
ऐसे फालतू के बोर लेखों से उसे क्या ! वह तो बस कुछ चुटकुले ही पढ़ना चाहता है.
चुटकुला-प्रेमी तकनीकी लेखों को देख भाग खड़ा होगा और ठीक ऐसा ही तकनीकी लेखों को पसंद करने वालों के साथ भी होगा.
अतः समय रहते अपने ब्लॉग का विषय सोच-समझ कर निर्धारित कर लें.
यदि आप को लगता है कि आप चुटकुले, खेल, व्यापार आदि विभिन्न विषयों पर लिख सकते हैं तो बेहतर होगा कि आप प्रत्येक के लिए अलग- अलग ब्लॉग बना लें.
अभी तो कुल मिलाकर हिन्दी में 14000 ( चौदह हज़ार ) ब्लॉग भी नहीं हुए हैं. अतः सम्भव है कि आप के ब्लॉग पर पाठक आ ही जाते हों, पर 2010 में या उसके बाद के वर्षों में क्या होगा इस पर भी यदि आज ही न सोचा गया तो कल आप का ब्लॉग ( चिट्ठा ) दम तोड़ देगा.
आपकी सुविधा हेतु
अगला लेख होगा-- " ब्लॉग का विषय कैसे चुनें ? "
Saturday, May 1, 2010
क्या आप अपना ब्लॉग शुरू करने जा रहे हैं ?
दूसरों की देखा-देखी ब्लॉग मत शुरू कर लें.
यदि कर लिया है तो भी अपने-आप से यह सवाल ज़रूर पूछें " आप ब्लॉगिंग क्यों करना चाहते हैं ! "
यह बेकार का सवाल नहीं है जनाब , इस सवाल का जवाब ही आप के लेखन की दशा और दिशा तय करेगा.
बहुत ही ज़रूरी है यह.
कुछ जवाब तो आपको विकल्प के रूप में भी दे सकता हूँ --
(1) अपनी बात कहने की आजादी को महसूस करना.
(2) मनोरंजन का एक नया साधन.
(3) हिन्दी में ब्लॉगिंग कर हिन्दी की सेवा करना.
(4) पूरे विश्व से जुड़ने की इच्छा.
(5) पत्रकारिता का एक नया रूप.
(6) आय का एक स्रोत .
(7) मन की भडास और कुंठा निकालने का साधन.
इन्हें मेरे ब्लॉग के सर्वे से लिया गया है. आप यहाँ पर अपनी राय दे सकते हैं. यदि आप एक नए ब्लॉगर हैं तो आपकी इच्छा शुरूआती चार में से ही होनी चाहिये. आप एकदम हलके- फुल्के ढंग से ब्लॉग बनाएँ.
ये सोच कर बनाएँ कि ब्लॉग का एड्रेस ( पता- ******.ब्लागस्पाट.कॉम ) और उसका टाइटिल यानी आपके ब्लॉग का क्या नाम होना चाहिये.
वैसे आप बाद में नाम, पता और लेख बदल भी सकते हैं.
यदि समस्या आए तो ब्लॉग्स-पंडित ई-गुरु राजीव किस लिए हैं :)
शुरुआत में कुछ भी लिखिए अखबार से कुछ लिखें या किसी पत्रिका से कुछ लिखें या अपनी ही कोई रचना लिखें और उसे प्रकाशित (पब्लिश) करें. आप को बेहद खुशी होगी.
फ़िर अपने ब्लॉग को सजाने का काम करें, उसमें घड़ी या कैलेंडर भी लगायें.
अन्य दूसरी सजावटी वस्तुओं के लिए मेरे अन्य लेख भी पढ़ें, इससे आपका ज्ञान भी बढेगा और मज़ा भी आएगा।
" ब्लॉग क्या है " इस विषय पर टी.वी. पर भी एक चर्चा चली थी. पेश है यह रिपोर्ट -
"ब्लॉग लिखे जाने के सात महत्वपूर्ण कारण "
एक ब्लॉगर था अन्जाना सा, एक लड़की पे वो मरता था. कुछ कहना था उसे, जाने किससे डरता था. वह सोच नहीं पा रहा था कि कैसे कहे.
बस क्या था , एक रोमांटिक सी कविता अपने ब्लॉग पर लिख मारी और वेबपता अपनी लैला को थमा दिया.
फ़िर क्या होना था, अरे गुरु ! लड़की पट गई.
जब लगी हो कलेजे में प्यार की आग,
तो फ़िर बनाओ एक प्यारा सा ब्लॉग.
लिख डालो एक ह्रदय-स्पर्शी राग,
बच्चा ज़रूर ही खुल जायेंगे, तुम्हारे भाग.
2. एक पिता अपनी चार साल की बेटी की रोज़-रोज़ की बातें अपने ब्लॉग पर लिखता है,
ताकि जब उसकी बेटी बड़ी हो जाए तो यह जान सके कि कितने प्यार-दुलार और कष्टों से माँ-बाप एक बच्चे को पालते हैं,
( और बच्चे बड़े होकर नालायक हो माँ-बाप का अपमान करते हैं. )
जिससे वह अपने माता-पिता के प्रति संवेदनशील हो सके.
उनके प्यार को महसूस कर सके, उनकी चिंताओं को समझ सके. जब उसे घर लौटने में देर हो तो वह फोन कर सके. वगैरा-वगैरा.
एक और कारण उनकी ब्लॉगिंग का था कि जब बेटी विवाहित होकर ससुराल चली जाए तो वह अपनी बेटी की करीबी अपने इस ब्लॉग के जरिये महसूस कर सकें.
ओ मेरी लाडो , तू मुझसे कभी दूर न जाना.
मैं तेरा बाबुल तू मुझसे कभी रूठ न जाना.
मैंने तेरे लिए बितायीं हैं रातें जाग कर,
तेरी विदाई के बाद तुझे देखूँगा इस ब्लॉग पर.
3. आप ने 'कुछ-कुछ होता है' देखी है, उसमें रानी मुखर्जी अपनी बेटी के लिए कुल 8 चिट्ठियाँ छोड़ जाती हैं, जो उनकी बेटी को 8 सालों तक उसके हर जन्मदिन पर मिलती रहती है.
ठीक वैसे ही एक माँ ने अपनी बेटी के लिए कुल सत्रह (post) लेख ब्लागस्पाट पर ब्लॉग बनाकर sheduled कर रखे हैं, जो उसके हर जन्मदिन पर प्रकाशित हो जायेंगे, अपने आप.
उसकी बेटी चाहे जहाँ रहेगी, पर वहाँ से अपनी माँ की लिखी चिट्ठियाँ नेट पर देख पाएगी.
मेरी बच्ची, मैं जिन्दा हूँ तुम्हारे लिए,
मैं आऊंगी मिलने तुझसे तेरे हर जन्मदिन पर.
तू रोना नहीं,मन लगा के पढ़ना, स्कूल जाना
और अपने पापा का ख़याल रखना.
4. एक कक्षा 8 में पढने वाला लड़का ब्लॉग लिखता है, ताकि वह इन्हें पढ़ सके जब वह 40-50 का हो जाए. उस समय वह सोचे कि बचपन में वह कैसी सोच रखता था.
ओह ! तो मैं ऐसा बौड़म था.
या फ़िर
जब मैं छोटा था तो ही ठीक था, अब बड़ा हो के बौड़म हो गया हूँ.
5. जब से तिवारी जी गुजर गए, उनकी पत्नी अपने पति की याद में ब्लॉग लिखती हैं.
हिन्दी की इतनी दर्द भरी कवितायें शायद कहीं और नहीं मिलेंगी.
पढ़ कर न रोये तो मुझे मार लीजियेगा, ऐसी दर्द भरी हैं.
सन 1995 से लिख रही हैं, सोच लीजिये कि कितनी सारी कवितायें उनके ब्लॉग पर होंगी.
(भाई, एक सवाल मत करना कि उस जमाने में कौन सी मशीन से वह हिन्दी लिखती थीं.)
इन्हीं ब्लॉग की कविताओं पर उनका एक काव्य-संग्रह भी छपा है. पैसा भी काट रही हैं.
ब्लॉग लिख-लिख के पैसा कमाना तो बड़ा ही आसान है. पैसे के लिए मेरे अन्य लेख पढ़ें.
6. शमीम लिखता है ताकि वह अपनी पढ़ाई का खर्चा निकाल सके, और अपनी बीमार माँ की दवाई की व्यवस्था कर सके.
उसके अब्बू को दुबई में नौकरी करनी पड़ती है, शमीम की बहन सुल्ताना अपने ब्लॉग पर ट्रांसलेशन करती है ताकि उसके अब्बू दुबई से चेक कर सकें और अपनी बेटी को पढ़ा सकें.
7. पाण्डेय जी की आठ बेटियाँ हैं. आठों मिलकर एक ब्लॉग चलाती हैं. यह ब्लॉग पारिवारिक है, जिसमें सभी अपने-अपने परिवार के बारे में लिखती हैं और बतियाती रहती हैं.
कल ही सुमन ने कुछ इस तरह अपनी छोटी बहन को संबोधित करते हुए लिखा था कि : ए कुसुम ! मेरी सास तो बड़ी जलकुकड़ी है यार. कल जब दूध में थोडी सी मलाई चली गई थी तो कह रही है कि मुझे घी और मलाई देकर मोटी बनाना चाहती हो, और आज जब दूध में मलाई नहीं दी तो बुड्ढी बैठी सुबक रही है कालोनी की औरतों को जमा करके कह रही है कि अब मेरा इस घर से दाना-पानी उठने वाला है. बहू ने मलाई वाला दूध देना बंद कर दिया है और चाहती है कि मैं मर जाऊं.
7. सातवाँ कारण यह ई-गुरु राजीव आप को देता है :-
यदि आप लड़की हैं तो आप का एक ब्लॉग तो होना ही चाहिए हर हालत में.
लिपस्टिक भूलो मगर ब्लॉग नहीं. यह तो आज का फैशन हो गया है.
21 सदी की नारी और उसका अपना ब्लॉग नहीं !!!! What a shame !!!
लो मैं ही तुम्हें कुछ नाम सुझाएँ देता हूँ कन्याओं .
1. टांग-तोडू
2. कसौटी ज़िन्दगी की
3. कहानी तेरी मेरी
4. पुरुषों की ऎसी-तैसी
5.पुरूष-युग का अंत
6. महिला-काल
7. महिला-युग
8. दिल से....
9. छठी का दूध
10. पुरूष या पशु
11. 21 वीं सदी की नारी
12. आज की नारी
13. मेरा साया
14. चलते-चलते
15. आधुनिका
16. तीसरी दुनिया
17. आधी आबादी
18. पुरुषों की बर्बादी
कहिये मोहतरमा कैसा लगा !!! तो मैं आज ही एक ब्लॉग पक्का समझूं.
यदि कोई समस्या हो तो यह ई-गुरु राजीव किस लिए है.
अब एक सलाह पुरुषों के लिए :-
क्या अब पुरुषों को भी सलाह देनी पड़ेगी !!!!!
अरे यार ! तुम लोगों ने अब तक अपना ब्लॉग नहीं बनाया !!!
ऐ तेरी...
अमाँ जाओ... हद कर देते हो.
यहाँ लोग ब्लॉग बना ले रहे हैं, सजा ले रहे हैं और कमा भी रहे हैं.
तुम लोग भी यार.
पहिले ब्लॉग बनाओ फ़िर मेरे से बात करना.
जमाना कहाँ से कहाँ निकल गया.
जमाना कम्पूटर , इंटरनेट हो गया है और अभी तक तुम........चलो, अब जब मेरे ब्लॉग पर आ गए हो तो समझो परमात्मा मिल ही जायेंगे.
अभी भी यह छूट चुकी ट्रेन मैं पकड़वा सकता हूँ, पूछो मुझसे कि कैसे ब्लॉग बनाएं, सजाएं और कमायें.
जैसे अंग्रेज़ी आना जरूरी हो गया है आज के समाज के लिए (एक ग़लतफ़हमी)
ठीक वैसे ही आज के समाज में यदि आप का एक ब्लॉग नहीं है तो आप महा-मूर्ख माने जायेंगे. (एक सच्चाई)
अरे तुम्हारा पड़ोसी टुन्ना ब्लॉग लिखता है,
अमिताभ बच्चन ( आँय-आँय) करके ब्लॉग लिखता है.
मनोज वाजपई ब्लॉग लिखता है.
अबे, आमिर खान भी ब्लॉग लिखता है.
अरे वो आजतक वाला पुण्य प्रसून वाजपेयी था न, अब उसकी दाल यहाँ गल रही है
नीतीश कुमार, मोदी-वोदी, आडवाणी सब यहीं पर जमे हैं
जिसका ब्लॉग नहीं वो समझो इडियट कांग्रेसी है. कल थरूर मिला था, कहने लगा की काश मैंने भी ट्वीट की जगह ब्लॉग बनाया होता.
(थरूर ने तो बस दो-चार ट्वीट की थी, बेचारा बर्बाद हो गया.)
हर पढ़ा-लिखा आदमी ब्लॉग लिख रहा है.
तुमहीं मेरे मोहन क्यों पीछे रह गए !!
अच्छा ये सब छोड़, शर्मा की बेटी का ब्लॉग देखा !!
क्या कहा कौन शर्मा !!
अरे सुहानी शर्मा, यार (तेरे सामने वाली खिड़की में, एक चाँद का टुकडा....) याद आया बच्चू.
हमसे भोले बनोगे तो जूते पड़ेंगे.
देख पुरूष-जाति ! तू तीन वर्गों में विभक्त है -
1. परुष पुरूष
2. पोंछ्चोरौना पुरूष
3. छिछोरे पुरूष
नीचे से शुरू करता हूँ,
छिछोरे हैं तो इससे मजेदार बात तो और कोई हो ही नहीं सकती है. एक ब्लॉग बनाइये और इन लड़कियों के चिट्ठों पर छिछोरे कमेन्ट कीजिए.
अरे भई, छेड़ने में जो स्वर्गीय आनंद है, वह संसार की किसी और चीज़ में कहाँ.
पर संभल के भाई, इस स्वर्गीय आनंद में स्वर्गीय हो जाने का खतरा भी है.
यदि पोंछ चोरौना हैं तो
ऐ साहेब ! आप को अपनी पूँछ चुराने के कई बहाने और जगहें मिल जायेंगी.
जैसे फलानी जी, डिमकानी जी, लिम्कानी जी , इनके चिट्ठे पर जाइए और इन्हें पढ़ कर कहिये कि ' आप बहुत अच्छा लिखती हैं ' ' आप दिल से लिखती हैं ' ' अत्यन्त मार्मिक लिखा है आप ने ' ' एकदम दिल को छू गया ' ' अति उत्तम विचार '
यदि आप मर्द हैं तो भाई मैं तुम्हारे पैर पकड़ कर कहता हूँ कि एक ब्लॉग बना लो, मैं तुम्हारे साथ हूँ.
आज इस हिन्दी के ब्लॉग जगत में शेरों का अभाव हो गया है. इस ब्लॉग-वन के सिंह बन जाओ और राज करो.
तुम किंग बन जाओ और मैं किंग-मेकर और तुम्हारा प्रधानमन्त्री बन जाता हूँ.
सच कहूं यार तो ब्लॉग जगत में सुपर ब्लॉगर अभी तक कोई नहीं है..............
तुम हो सकते हो, अगर चाहो.........
